प्राधिकरण ने गौतम बुध नगर पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

यहां हम बताना चाहते हैं कि पिछले काफी समय से जगत फार्म और अमृतपुरम के अवैध बाजारों के निर्माण के अवैधता के संबंध में लगातार कई शिकायतें ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण और पुलिस विभाग को प्राप्त हो रही हैं। जिसमें की पुलिस विभाग के द्वारा लगातार इन शिकायतों को टालमटोल कर टरकाया जा रहा है ।जबकि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के द्वारा 2013 से लेकर 2016 और 2019 में इनकी अवैधता के संबंध में कई नोटिस और पत्र निर्गत किए हैं ।यहां पर मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ में एक शिकायत हुई जिसमें कि तथ्यों के साथ यह बताया गया कि किस प्रकार से दरबारा सिंह और उसके पुत्र परमिंदर सिंह और अमरजीत सिंह और उसके अन्य साथी मनजीत सिंह, देवेंद्र सिंह ,जयदेव सिंह आदि के साथ कूट रचित साजिश करके इन्होंने आवासीय जमीन को कमर्शियल बताकर बिक्री की और हजारों करोड़ रुपए का घोटाला किया ।

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यहां पर कई प्रकार के अवैध निर्माण किए गए जबकि 2013 में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने 13 फरवरी 2013 को पत्र लिखकर अभियोग पंजीकृत करने के लिए थाना कासना को दिया ।यहां पर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण हाल ही में सूचना में यह अवगत करवाया है के गांव तुगलपुर हल्दोना, जगत फार्म अमृतपुरम, तहसील सदर जिला गौतम बुध नगर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में स्थित है। इस ग्राम में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के प्रावधान लागू हैं। उपरोक्त एक्ट की धारा 10 के प्रावधानों के अनुसार अधिसूचित क्षेत्र के उपयोग में कोई व्यक्ति भूमि उपयोग परिवर्तित करता है तो प्राधिकरण को अधिक अधिकार है कि वह ऐसा भूमि उपयोग परिवर्तन रुकवा दें और यदि भू उपयोग परिवर्तन किया जा चुका है तो उसे मूल दशा में परिवर्तित करा दे और उस पर हुए खर्चे की वसूली कर ले। यहां पर जयदेव सिंह देवेंद्र सिंह मनजीत सिंह जो कि निवासी जगत फार्म मार्केट के हैं जिनके द्वारा खसरा संख्या 53 पर अवैध रूप से निर्माण करवाए गए हैं जो कि बिना सूचना और बिना अनुमति में लाए गए हैं। यहां पर उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा कराए जा रहे अवैध कार्यों को रोकने के लिए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर रुकवाने का प्रयास किया गया ,लेकिन उसके बावजूद यह अवैध निर्माण कार्य कराए जाते रहे हैं ,यह कहना है ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण का। अवैध निर्माण से सुनियोजित विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है तथा इससे प्राधिकरण को क्षति भी हो रही है। इसलिए इन के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना कासना ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के द्वारा 13 फरवरी 2013 को लिखा गया पत्र 2013 /2282 है।

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इसके पश्चात 8 मई 2019 को ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के द्वारा नोडल अधिकारी मुख्यमंत्री सन्दर्भ को आख्या में लिख कर दिया गया है। खसरा संख्या 53 पर अवैध निर्माण कार्य पूर्व के हैं अवैध निर्माण कर्ताओं के विरुद्ध उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम 1976 की धारा 10 के अंतर्गत नोटिस समय समय पर दिए जाते रहे हैं और उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार अवैध निर्माण कर्ताओं के विरुद्ध 13 फरवरी 2013 को कासना थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने हेतु तहरीर भी दी गई थी ।जिसको थाना कसना द्वारा नज़रंदाज़ किया गया है। यहां बहुत ही महत्वपूर्ण विचारणीय है विकास प्राधिकरण ने आगे लिखा है पुलिस विभाग के द्वारा कतिपय अब तक प्राथमिकी पंजीकृत नहीं की गई ।स्थलीय निरीक्षण कराया जा रहा है। थाने कार्यवाही उपरांत सूचित कराया जाना संभव होगा ।यहां पर आपको जानकारी दें कि पिछले 3 दिन से ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा अधिकारियों के द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण और जगत फार्म स्वामियों को संरक्षण दिए होने के कारण यह प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पा रही है ।यहां नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्थल है जहां पर सभी लोग देखते हैं किस प्रकार से कार्य प्रणाली हो रही है ।इस प्रकार से सरकारी संस्था ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद वहां पर अभियोग पंजीकृत ना होना यह दिखाता है यहां की पुलिस क्या कार्य कर रही है। यहां एक बात है जो पुलिस अधिकारी ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की तहरीर को ठेंगा दिखा रहे हैं वह आम जनता की क्या सुनवाई करते होंगे।जगत फार्म स्वामियों के पास इतना ताकत और पैसा है जिसके आगे गौतम नगर पुलिस बोनी साबित हो रही है ।आश्चर्य का विषय है कि अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों द्वारा निर्देशित किए जाने के बावजूद मुकदमा पंजीकृत नहीं हो पाया है । क्या अधिकारी इस तरह से काम करते रहेंगे या अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने की तरफ ध्यान देंगे। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि इन लोगों पर कई अपराधिक मामले दर्ज हैं जगत फार्म के स्वामियों के परिवार के लोगों पर दस अपराधिक मामले दर्ज हैं और 1 दर्जन से ज्यादा एनसीआर भी दर्ज हैं जिसमें 8 मामलों में पुलिस के द्वारा पिछले 10 साल के दौरान दोषी पाए जाने पर इनके विरुद्ध आरोप पत्र भी न्यायालय में दाखिल हो चुके हैं यह सोचने की बात है कि इस रसूख के आगे पुलिस विभाग के द्वारा गैंगस्टर और रासुका की कार्यवाही भी नहीं की जा सकी जो की मिलीभगत का स्पष्ट प्रमाण है क्या न्याय सिर्फ इनके हाथ की कठपुतली है क्या कानून सिर्फ एक आम और गरीब इंसान के लिए होता है और इन जैसे बड़े घोटाले वालों के लिए किसी प्रकार का कोई कानून लागू नहीं होता यह सोचने का विषय है

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