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क्या है अवैध कहे जाने वाले जगत फार्म की ताकत?

ऐसे कई घोटाले हैं जो जगत फार्म के मालिकों यानी परमिंदर सिंह,मंजीत सिंह , ओमकार सिंह , जोगिंदर सिंह , महेन्द्रपाल , अमरजीत सिंह , समरप्रीत सिंह , दरबारा सिंह , देवेंद्र सिंह , कुलविंदर सिंह , अमरजीत कौर सरबजीत कौर दलजीत सिंह व इनके साथीयों ने मिलकर अंजाम दिए है व इनके सरगना मंजीत सिंह व परमिंदर सिंह के नाम पर कई शिकायतों व मुकदमे भी दर्ज हैं।
जिनके ऊपर महिला उत्पीड़न प्रताड़ना से ले कर,हत्या की साज़िश व IPC की संगीन धाराओं के तहत आरोप लगा हुआ है , साथ ही बीते तमाम वर्षों में ऐसे कई शिकायती प्रार्थना पत्र हैं जिस में इन लोगों पर सरकार को व जनता के साथ कूट रचित साजिश कर धोखाधड़ी करने के संगीन आरोप लगे हैं।फिलहाल एक मामला सामने आया जिस में अपने ऊपर मुक्कदमा पंजीकृत होने के बाद मंजीत सिंह परमिंदर सिंह ने एक ब्लैकमेलिंग के अभियस्त अपराधी जिस पर बलात्कार व छेड़छाड़ के मुकदमे पंजीकृत है को मोटी रकम दे कर अपने साथ कुटरचित साजिश में शामिल कर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को बदनाम करने की साज़िश रची डाली और उसको अंजाम तक पहुचने की पुरजोर कोशिश भी की जिसका खुलासा होने के बाद कई सनसनी खेज खुलासे हुए ।
गौरतलब है साथ ही पीड़ित महिला को अपनी साज़िश का शिकार बनते हुए पूर्ण रूप से बदनाम करने में इन अपराधियो ने कोई कसर नही छोड़ी।
आरोप है कि इन साजिशकर्ताओं के द्वारा पूर्ण प्रयास किया गया कि महिला जो इनके दिए गए ज़ख्मों से लगातार सालों से जूझ रही है जो अब नासूर बन चुके है वो आत्म हत्या तक करने को मजबूर हो जाये।

फिलहाल जब जनपद पुलिस ने महिला की वेदना को दरकिनार कर दिया , तब पीड़ित महिला ने तंग आकर प्रदेश के सर्वोच्च अधिकारियों व उत्तरप्रदेश साशन को शिकायत दी जिस में जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर भी महिला की हत्या की साज़िश में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस सम्बंध में महिला के द्वारा कई पुख्ता साक्ष्य भी दिए जाने का दावा किया गया है। इसी क्रम में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा जगत फार्म स्वामियो की पोल खोलता एक प्रर्थना पत्र 28 मार्च को भी दिया गया जिस को जनपद गौतमबुद्ध नगर के उच्च पदीय पुलिस अधिकारियों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल कर दरकिनार कर दिया है
इससे साफ प्रतीत होता है कि पिछले 26 दिन में इन प्रार्थना पत्रों की जांच एक कदम तक आगे नही बढी। बड़े अचंभे का विषय है कि जिन अधिकारियो की ईमानदारी के डंके पिटे जाते है , की तैनाती के बावजूद इतने बड़े अप्राधियों पर कोई कार्यवाही क्यो नही हो रही हैं ।आखिर ऐसी कौन सी ताकत है जो इन बेलगाम अपराधियों पर कार्यवाही से पुलिस को रोक रही है।

बहराल अगर पीड़ित की बात पर गौर किया जाए तो जनपद के उच्चतम पुलिस अधिकारियोंकी मिलीभगत व सांठगांठ की बात सामने आ रही है। शायद वो ही अधिकारी की परोक्ष ताकत ने 2016 में भी बड़ी कार्यवही होने से रोक दिया था , वही ताकत इस वक़्त भी इन धनपशुओं और धोखेबाजी ठगी करने वालों के काम आ रही है।
एक तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस तमाम दावे और वादे करती है महिला उत्पीड़न को समाप्त करने की , कई उत्तर प्रदेश पुलिस मुहिम चलती है
“”चुपी तोड़ो खुलकर बोलों””
लेकिन इन दावों की और वादों की पोल पट्टी खोलती है ये हकीकत जहाँ अपराधी बेखौफ बेधड़क आये दिन वारदातों को देते है अंजाम ।

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