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मां के थप्पड़ से मिली ये सीख बैंक की जॉब छोड़ IPS बन गए अनुराग आर्य

2013 बैच के आईपीएस है अनुराग आर्य क्राईम कंट्रोल करने के साथ RBI मे मैनेजर भी रह चुके है अमेठी के नए एसपी अनुराग

1 दिन पहले IPS अधिकारियों के स्थानांतरण सूची में अमेठी के नए एसपी के रूप में अनुराग आर्य ने जिले की कमान संभाले गे बताते चलें की बागपत जिले के छितरौली गांव के रहने वाले एसपी अनुराग आर्य 2013 बैच के, आईपीएस अफसर होने के रिजर्व बैंक आफ इंडिया के मैनेजर भी रह चुके है वही, अनुराग आर्य के पिता रमेशचंद्र आर्य पेशे से डॉक्टर हैं साथ ही मां,पूनम भी डॉक्टर हैं

फास्ट यूपी न्यूज से खासबातचीत मे अमेठी कि कमान सभांलने वाले एसपी अनुराग ने कहा-बचपन से ही उन्हें आर्मी की वर्दी अच्छी लगती थी, इसलिए उन्होने प्रारम्भिक शिक्षा भी आर्मी स्कूल मे कि हालांकि, ग्रैजुएशन के बाद उन्होने सिविल सर्विस ज्वाइन करने का मन बना लिया

जानकारी देते हुए अनुराग ने बताया उनकी शुरुआती पढ़ाई बागपत शिशु मंदिर में हुई है शुरू से ही, युवा आईपीएस अफसर को स्पोर्ट्स का शौक भी था, इसलिए पढाई के साथ साथ जिले के ही स्पोर्ट्स कॉलेज में भी एडमिशन ले लिया और अपने इस शौख को भी हकीकत के रूप मे, पूरा करते हुए वर्ष 2009 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन कि पढाई पूरी कि वर्ष 2010 से अनुराग आर्य ने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी साथ ही वर्ष 2012 में RBI ग्रेड बी मैनेजर की परीक्षा की तैयारी को भी पूरा किया और परिणाम रवरूप उनका चयन भी RBI, कानपुर में मैनेजर के पद पर हुआ यहां इनकी इनडोर वर्किंग थी, लेकिन अनुराग आर्य को, आउटडोर वर्किंग पसंद थी, इसलिए इन्होने नौकरी मिलने के तीन माह बाद ही यह नौकरी छोड़ दी और सिविल सर्विस की दोबारा तैयारी प्रारम्भ कर दी अनुराग आर्य ने तैयारी के बाद वर्ष 2012 में सिविल सर्विस का एग्जाम दिया और पहली बार में ही क्वालीफाई कर लिया साथ ही कुछ महीने के ट्रेनिंग के बाद वर्ष 2013 में आईपीएस के लिए सिलेक्ट हुआ

आईपीएस अनुराग आर्य को सरकारी गाडी कम घोड़े वा साईकिल पर बैठकर पेट्रोलिंग करना ज़्यादा पंसद थी ये जब भी ऐसी सवारी से निकलते थे तो सुर्खियां बन जाती हैं ऑफिसर अनुराग अक्सर ही अपने ऐसे एक्शन की वजह से चर्चा में रहते थे IPS ऑफिसर अनुराग आर्य सामान्य परिवार से तालुक रखते है हालाकि परिवार मे अनुराग के साथ इनके माता पिता भी चिकित्सक के पद पर कार्यरत है वही आज उन्होने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता के साथ अपने, कुछ खास दोस्तो को भी दिया सिविल कि परीक्षा तैयारी के दौरान 3-4 घंटे न्यूज पेपर पढ़ने की वजह से उन्हें एग्जाम के दौरान काफी मजबूती मिली हालाकि उन्होने बताया इन तैयारियो कि पढ़ाई मेंआत्मविश्वास का होना बहुत ही आवश्यकत है बताते चले कि वर्दी पहनने की ललक में अनुराग ने 2012 में सिविल सर्विसेज का एग्जाम दिया और फर्स्ट एटेम्पट में ही उन्हें सफलता मिल गई।वर्ष 2013 में उनका रिजल्ट आया और उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ दी जिसके बाद2014 में वो IPS की 11 महीने की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद चले गए वर्ष 2015 में अनुराग को ट्रेनी के तौर पर पहली पोस्टिंग गाजियाबाद में मिली यहां 5 महीने गुजारने के बाद 2016 में उनकी पोस्टिंग वाराणसी में हो गई। यहां, उन्होंने 16 महीने बतौर सीओ गुजारेफिर बीते वर्ष 2017 में उन्हें उसी शहर में बतौर एसपी पोस्टिंग मिल गई, जहां उन्होंने कभी बैंक मैनेजर के तौर पर काम किया था

टीम ने खास बातचीत मे एसपी अनुराग आर्य ने सब को बता दिया बताते चले कि यूपी के कानपुर ईस्ट का कार्यभार संभालते ही अनुराग का वर्किंग स्टाइल स्थानीय लोगों को काफी पसंद आने लगा युवा आईपीएस अधिकारी अनुराग आर्य सरकारी गाड़ी छोड़ कभी घोड़े पर सवार होकर तो कभी रात के समय साइकिल पर पेट्रोलिंग करने निकल जाना और पुलिस चौकियों पर औचक निरीक्षण करने की वजह से अनुराग की शहर में काफी चर्चाएं होती रहती हैं अनुराग ने बताया कि अचानक चेकिंग के लिए निकलने से काफी नई चीजें पता चलती हैं साथ ही जनता वा पुलिस के बीच सामन्जस्य कितना है उन सब का, फीडबैक शत प्रतिशत मिलने के साथ जमीनी हकीकत को जानने का मौका मिलता था

परेशान लोगो, के मशीहा है अनुराग सुधर जाए अमेठी के लापरवाह

फास्ट यूपी न्यूज मे, खास बातचीत मे, अनुराग ने वाक्या याद करते हुए बताया कि जब वे गाजियाबाद में अंडर ट्रेनिंग थे तो, उस वक्त एक मजदूर ने अपनी मेहनत के 700 रुपए किसी के रख लेने कि शिकायत उनसे कि थी शिकायत के बाद युवा पुलिस अधीक्षक ने गरीब मजदूर का पैसा भी वापस दिलवाया था इस मदत के बाद आईपीएस अनुराग आर्य को एहसास हुआ कि उस व्यक्ति के 700 रुपए, किसी के 7 करोड़ से ज्यादा एहमियत रखते हैं उन्होने कहा वे बचपन से ही ऐसे लोगों की मदद करना चाहते थे, और किस्मत ने भी उनका साथ दिया और आज वे इस लायक बने है उन्होने एक लाईन मे अनूठी का कार्यभार सभालने से पहले कहा कि वे अपराध पर नियंत्रण रख्खे कि साथ ही जनता के साथ स्थानीय पत्रकारो से भी समय समय पर फीडबैक लेते रहेगें

आखिरी सवाल मे बताई परिवार कि कहानी

IPS अनुराग आर्य ने न्यूज टीम से बातचीत मे अपनी पारिवारिक कहानी भी बया कि बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होने बताया कि “एक बार बिना बताए मां के पर्स से उन्होने 50 रुपए का नोट निकालकर टॉफी खाने के लिया था उस वक्त उन्हें ये भी पता नहीं था कि ये नोट 50 का है या 10 का हालकि बचपन मे ही अनुराग कि ये बात दुकानदार ने मां को बता दी और मां ने इस बात को लेकर उन्हें थप्पड़ भी मारे थे साथ ही मां ने उन्हें सीख देते हुए ये, भी कहा था कि किसी का सामान लेने से पहले उससे परमिशन लेनी चाहिए उन्होने इस विषय पर जोर देते हुए बातचीत मे बताया कि उस दिन के बाद एक बात समझ आई कि गलत काम करोगे तो दंड मिलेगा और सही काम करते हो तो शाबा़शी फिलहाल अनुराग आर्य आज भी वैसे ही तेज तर्रार आईपीएस अधिकारी के रूप मे, अपनी खास पहचान बनाई है साथ ही अमेठी के नए, कप्तान अनुराग आर्य के लिए़ मां मेरे प्रेरणास्रोत हैं

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