सोनभद्र-सुचना का अधिकार अधिनियम(संशोधन) विधेयक-2018 निराशाजनक व पारदर्शिता के विरुद्ध (अंकुश दुबे)

सोनभद्र /अनपरा मानसून सत्र मे केन्द्र मे सत्तासीन भाजपा सरकार सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 मे संशोधन हेतु सूचना का अधिकार(संशोधन) विधेयक-2018 के जरिये संशोधन करना चाह रही है व इस संशोधन के जरिये केन्द्र सरकार केन्द्रीय सूचना आयुक्त व राज्य सूचना आयुक्त का वेतन तथा कार्यकाल निर्धारण करेगी अगर अप्रत्यक्ष तौर पर देखा जाये तो सूचना आयोग सरकार के नियंत्रणाधीन हो जायेगा व इस संशोधन के बाद आरटीआई एक्ट मे अन्य संशोधनों के रास्ते भी खुल जायेगे।
:- सामाजिक व एनएसयूआई कार्यकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट अंकुश दुबे ने इस पर बताया कि सुचना के अधिकार अधिनियम-2005 मे संशोधन निराशाजनक है तथा पारदर्शिता के विरुद्ध है क्योंकि आरटीआई एक्ट-2005 विभागीय स्तर पर व सरकारो की आम जनमानस के द्वारा निगरानी का एक प्रभावी शस्त्र है तथा केन्द्रीय सूचना आयोग भी सतर्कता आयोग, चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र संस्था है तथा इसे वर्तमान मे केन्द्र सत्तासीन भाजपा सरकार कमजोर करना चाह रही है तभी तो मानसुन सत्र मे आरटीआई(संशोधन) एक्ट-2018 लाकर केन्द्रीय सूचना आयुक्त तथा राज्य सूचना आयुक्तों को सरकार के नियंत्रण मे लाना चाह रही है और पारदर्शिता का दावा करने वाली भाजपा के दावे खोखले शाबित हो रहे व उन्होंने बताया कि अभी हाल मे ही जनपद सोनभद्र के पिपरखांड मे एकलव्य माडल आवासीय विद्दालय के निर्माण मे 2 करोड के गबन के मामले को सामने लाने मे आरटीआई एक्ट-2005 से उन्होंने काफी सहायता प्राप्त की है तथा उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मेल के जरिये इसका विरोध व प्रतिकार अभियान चलाये जाने के लिये आग्रह किया है ताकि पारदर्शिता तथा सुचना आयोग की स्वतंत्रता प्रभावी न हो व आम जनमानस की निगरानी सरकार पर बनी रहे।

सोनभद्र
रंगेश सिंह

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