सोनभद्र-श्रमिक संगठन ने रोजगार की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

सोनभद्र /ओबरा तापीय परियोजना में कार्यरत कम्पनियों द्वारा स्थानीय बेरोजगार युवाओं एवं श्रमिकों की अनदेखी दे रहा है औद्योगिक अशांति को न्योता!सेवायोजन विभाग की उदासीनता के कारण ओबरा के स्थानीय बेरोजगारों को नही मिल रहा है रोजगार !
भारतीय संविदा श्रमिक संगठन के प्रदेश कार्यालय ओबरा-सोनभद्र मे स्थानीय बेरोजगारी की समस्या को लेकर दिनांक- 02/06/2018 को एक अहम बैठक आहूत की गई,जिसकी अध्यक्षता संगठन के प्रदेश महामंत्री नागेन्द्र प्रताप चौहान ने कि,सोनभद्र में बेरोजगारी की समस्या पर चर्चा करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष श्री मणि शंकर पाठक ने कहा कि, स्थानीय बेरोजगार युवाओं एवं श्रमिकों द्वारा रोजगार की मांग का हमारा संगठन समर्थन करता है , बेरोजगारी का दंश झेल रहा सोनभद्र का हर एक युवा आज मानसिक तनाव से गुजर रहा है,योग्य होने के बाद भी यहाँ के युवाओं को रोजगार न देकर ओबरा “ब” तापीय परियोजना एवं ओबरा “स” परियोजना मे कार्यरत कम्पनियाँ यहाँ के प्रत्यके बेरोजगार युवाओं को मुँह चिढ़ाने का कार्य कर रही है,सोनभद्र सेवायोजन विभाग ने भी सोनभद्र की बेरोजगारी के सामने अपने हाँथ खड़े कर लिए है, हमारा संगठन सोनभद्र के प्रत्यके युवाओं को रोजगार दिलाने हेतू सदैव प्रयासरत रहेगा,जब तक यहाँ का युवा बेरोजगार है सरकार द्वारा की जा रही

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तमाम विकास के दावे खोखले है,इसी क्रम में संगठन के प्रचार-प्रसार मंत्री श्री रणजीत तिवारी ने कहा कि,ओबरा तापीय परियोजना में कार्यरत कम्पनियाँ बाहर से मजदूरों को बुलाकर कार्य करा रही है और यहाँ के स्थानीय युवाओं को रोजगार नही दे रही है जो औद्योगिक अशांति फैलने का मुख्य कारण बन सकता है।संगठन के प्रदेश महामंत्री नागेन्द्र प्रताप चौहान ने कहा कि, क्षेत्रीय बेरोजगार युवाओं एवं श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो सके इसी उद्देश्य से सन् 1959 में संसद द्वारा सेवायोजन कार्यालय (रिक्तियों का अनिवार्य अधिसूचन) अधिनियम 1959 पारित किया गया, जिसे भारत सरकार के श्रम मंत्रालय की विज्ञप्ति सं. ई०पी०/11/(1)60, दिनांक 01-04-1960 द्वारा इसी तिथि से सम्पूर्ण देश में लागू कर दिया गया,इस अधिनियम की परिसीमा में सार्वजनिक क्षेत्र के समस्त सेवायोजक तथा निजी क्षेत्र के (कृषि क्षेत्र के अतिरिक्त) वें सेवायोजक हैं, जिनके कार्यालय/संस्थानों/प्रतिष्ठानों में सामान्यतया 25 या इससे अधिक कर्मचारी सेवारत हैं ,प्रदेश के सेवायोजन कार्यालयों द्वारा निजी क्षेत्र में भी बेरोजगार अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करने के प्रयास किये जा रहे हैं .सेवायोजन कार्यालयों द्वारा बेरोजगार अभ्यर्थियों एवं नियोजकों को एक ही स्थान पर आमंत्रित कर रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें नियोजक अपनी आवश्कतानुसार बेरोजगार अभ्यर्थियों का चयन करते हैं तथा बेरोजगार अभ्यर्थियों को भी अपनी इच्छानुसार संस्थान/कंपनी चयन करने की सुविधा उपलब्ध रहती है।

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रोजगार ⁄ बेरोजगारी के विभिन्न आयामों के संबंध में सूचनाओं का एकत्रीकरण, संकलन, प्रचार एवं प्रसार राज्य रोजगार बाजार सूचना कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के संगठित क्षेत्र के नियोजको से त्रिमास के अन्त में उनके संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या त्रिमास में उत्पन्न रिक्तियों, सेवायोजको द्वारा रिक्तियों हेतु उपयुक्त अभ्यर्थियों की कमी की सूचना संबंधित क्षेत्र के क्षेत्रीय / जिला/ नगर /सेवायोजन कार्यालय द्वारा त्रैमासिक आधार पर एकत्र की जाती हैं |वर्तमान समय में उक्त सूचनाएं सार्वजनिक क्षेत्र के समस्त अधिष्ठानों एवं निजी क्षेत्र के अकृषि अधिष्ठानों द्वारा जिनके यहाँ प्रायः 25 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, सेवायोजन कार्यालय (रिक्तियो का अनिवार्य अधिसूचना) अधिनियम 1959 के अंतर्गत निर्धारित प्रपत्र ई०आर०-1 पर अधिनियम की धारा-5 तथा तत्सम्बन्धी नियमावली के अंतर्गत प्रेषित करना अनिवार्य हैं ।
अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें ।अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |

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अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें |अधिनियम की धारा -4 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सेवायोजकों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे धारा -3 द्वारा अवमुक्त रिक्तियों के अतिरिक्त अपने कार्यालय/ संस्थानों/ प्रतिष्ठानों में होने वाली समस्त रिक्तियां अधिनियमान्तर्गत निर्मित नियमावली 1960 की नियम -4 द्वारा निर्धारित प्रारूप पर कम से कम 15 दिनों का समय देते हुए सम्बंधित सेवायोजन कार्यालय को अधिसूचित करें ।

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अधिनियम की धारा- 6 में निहित व्यवस्था के आधार पर विभाग के अधिकारियों द्वारा नियोजकों के नियुक्ति सम्बन्धी अभिलेखों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाता हैं कि अधिनियम कि विभिन्न धाराओं का विधिवत पालन किया जा रहा है या नही,अधिनियम कि धारा -7 के अंतर्गत दोषी पाये गये नियोजकों के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की व्यवस्था है।
परन्तु ओबरा तापीय परियोजना में इस अधिनियम का पालन कोई भी कम्पनी नही कर रह रही है, एवं इस अधिनियम की कमियों का फायदा उठा रही है,जिसके कारण यहाँ उत्पन्न रोजगार की जानकारी न होने के कारण स्थानीय बेरोजगारी बढ़ रही है,कम्पनियों द्वारा कम मजदूरी देकर बाहरी मजदूरों को बुलाकर कार्य कराया जा रहा है,जिसके कारण यहाँ के लोगों को रोजगार उपलब्ध नही हो पा रहा है।जब यहाँ का स्थानीय बेरोजगार युवा एवं श्रमिक उक्त कम्पनियों से रोजगार माँगने जाते है तब उन्हें नही रखने की बात कह कर भगा दिया जाता है जिसके कारण यहाँ के बेरोजगार युवाओं के मन में अशांति व आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।यदि जिला प्रशासन व परियोजना प्रशासन ने इस गम्भीर विषय को अपने संज्ञान में लेकर स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के कोई ठोस कदम नही उठाया तो हमारा संगठन सोनभद्र के सभी बेरोजगार युवाओं एवं श्रमिकों को एक मंच पर लाकर ओबरा परियोजना प्रशासन के खिलाफ आन्दोलन के लिए बाध्य होगा।
सभा के दौरान सभी सदस्यों ने अपने अपने विचारों को रखा और यह निर्णय लिया गया कि, रोजगार ही सोनभद्र की बेरोजगारी का समाधान है !

Input By:Rangesh Singh

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