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मुरादाबाद जिले में पीतल उद्योग के बुरे दिन

मुरादाबाद जिले में पीतल उद्योग के बुरे दिन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लगातार आर्थिक मंदी से जूझ रहे पीतल कारोबार को अब ईरान ने बड़ा झटका दिया है। परमाणु प्रसार कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की वजह से अमेरिका सहित कई देशों ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसकी वजह ईरान ने भारत से आयात किए जाने वाले 1300 से अधिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है।प्रतिबंध के चलते अकेले पीतल कारोबार को ही पांच सौ करोड़ रुपये की चपत लगी है। ईरान से मिले पुराने ऑर्डर बनकर तैयार है, लेकिन अब खरीददार उनको लेने के लिए तैयार नहीं हैं। तैयार सामान बंदरगाहों पर फंसा हुआ है और जो ऑर्डर भेजे गए हैं,

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उनकी पेमेंट अधर में लटकी हुई है मुरादाबाद के बड़े निर्यातकों में शामिल सतपाल सिंह पिछले कई दिनों से अपने ईरानी खरीददारों को ऑर्डर कन्फर्म करने के मैसेज भेज रहे हैं, लेकिन उनके भेजे संदेशों का कोई जबाब नहीं दे रहा। अकेले सतपाल ही नहीं दर्जनों निर्यातक ईरानी खरीददारों से सम्पर्क करने की कोशिशों में लगे हैं, लेकिन प्रतिबंध के बाद खरीददार ऑर्डर लेने से बच रहे हैं रियाल की कीमत में गिरावट के बाद ईरान ने भारत से आयात होने वाले 1339 उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें पीतल के सजावटी आइटम और अन्य पीतल उत्पाद भी शामिल हैं। हालांकि पीतल के बड़े एक्सपोर्टर्स के लिए मुश्किलें कम है, लेकिन छोटे एक्सपोर्टर्स के लिए ईरानी संकट मुसीबत बनकर आया है। कई एक्सपोर्टर्स बिना पेमेंट के अपना ऑर्डर भेज चुके हैं, जो अब बंदरगाहों पर कस्टम क्लीयरेंस के लिए अटका हुआ है।

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क्लीयरेंस मिलने के बाद भी ऑर्डर ईरान नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए उसको वापस लेना निर्यातकों की मजबूरी बन गया है। वहीं एक्सपोर्टर्स उत्पादों की डिलीवरी नहीं हो पाने के चलते कारीगरों की पेमेंट भी नहीं कर पा रहे हैं। सरकार से आखिरी उम्मीदें निर्यातक अपने ऑर्डर स्थानीय कारीगरों से तैयार करवाते हैं, लेकिन अब ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, तो कारीगर भी खाली हाथ बैठे हैं। मुश्किलें उन कारीगरों की ज्यादा है, जो सिर्फ पीतल उत्पाद तैयार करते हैं। क्योंकि ईरान में ही शुद्ध पीतल उत्पाद निर्यात किए जाते थे। ईरान संकट का असर आने वाले समय में और भी ज्यादा देखने को मिल सकता है। इस संकट की घड़ी में निर्यातकों को सरकार से ही आखिरी उम्मीद है। निर्यातकों का कहना है कि सरकार को कारीगरों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और कारीगरों को मुआवजा देना चाहिए!

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