मुरादाबाद- किसान कूड़े पर फेंकने को मजबूर टमाटर

टमाटर, जो कभी किचन में गृहणियों का लाडला हुआ करता था और किसान भी इसे बेच के इतराते थे। कुछ महीने पहले इसकी कीमतें आसमान छू रही थी, लेकिन आज यह हालत हो गई है कि थाली में कभी चटनी तो कभी सलाद बनकर स्वाद बढ़ाने वाला टमाटर सड़कों पर पड़ा नजर आ रहा है। थोक मंडी में एक साल पहले जो टमाटर 80 रुपये किलो बिक रहा था, वह आज मंडियों में 50 पैसे से लेकर एक रुपये किलो बिक रहा है।मुरादाबाद में टमाटर किसानों से प्रभावित हो कई विदेशी कम्पनियां किसानों को बीज और प्रशिक्षण मुहैया करा रही है।

कोरिया की नोंगवुड कम्पनी में काम करने वाले हरिशंकर पाठक कहते हैं कि इलाके के किसान अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों और उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, जिससे इनकी फसल काफी अच्छी होती है। हरिशंकर पाठक खुल कर कुछ नहीं कहते, लेकिन टमाटर का भाव न मिलने से दुखी किसानों का दर्द वह बखूबी समझ रहे हैं।

सरकारी विभाग को नहीं पता टमाटर का कीमत
मंडी समिति के सचिव अशोक कुमार बताते हैं कि इस बार मंडी में टमाटर की कीमतें पिछले साल के मुकाबले कम हैं, लेकिन क्यों कम हुई और इसके पीछे क्या कारण है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि सरकारी विभागों को यह मालूम ही नहीं कि टमाटर किस कीमत पर बिक रहा है और भाव न मिलने से किसानों के हालात कैसे हो गए हैं।
input by-SHARIQ SIDDIQUI

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