बरेली-विलुप्त हो रही राधेश्याम कथावाचक की ख्याति को नई पहचान देंगे डीएम

विलुप्त हो रही राधेश्याम कथावाचक की ख्याति को नई पहचान देंगे डीएम
० योगी सरकार के होनहार अफ़सर की पहल
बरेली रंगमंचशैली के हिन्दी नाटककारों में से एक व राधेश्याम रामायण के रचेता पं राधेश्याम शर्मा का हिंदी साहित्य के क्षेत्र में बड़ा प्रमुख नाम है। रामकथा के गायन, वाचन या मंचन से आप किसी भी रूप में जुड़े हुए हैं तो पंडित राधेश्याम कथावाचक का नाम आपने जरूर सुना होगा। मगर उनके सराहनीय कार्यों को समाज भूलता जा रहा है।भविष्य में उनका नाम व काम समाज को याद रहे इसको लेकर ज़िलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने कार्ययोजना तैयार की है । उन्होंने बताया कि
पं राधेश्याम शर्मा ने लोक नाट्य शैली को आधार बनाकर खड़ी बोली में उन्होंने रामायण की कथा को 25 खण्डों में पद्यबद्ध किया। इस ग्रन्थ को राधेश्याम रामायण के रूप में जाना जाता है। उनकी यह रामायण उत्तरप्रदेश में होने वाली रामलीलाओं का आधार ग्रन्थ बन चुकी है ।मगर उनका नाम समाज भूलता जा रहा है।जो एक चिंता का विषय है।इस पर ज़िलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने गम्भीरता से चिंतन किया तो उन्हें लगा इस दिशा में उन्हें कुछ करना चाहिए ताकि भविष्य में राधेश्याम रामायण के रचैयता की ख्याति बनी रहे ।जल्द जनसहयोग के माध्यम से ज़िलाधिकारी शहर में एक स्थान चयनित कर उनकी प्रतिमा स्थापित करवाकर उसे एक रमणीक स्थल बनाने की कार्ययोजना तैयार की है । इसको लेकर शहर के तमाम प्रबुद्ध लोगों से इस बारे में सुझाव भी लिए जा रहे है । यूँ तो ज़िले में कई डीएम का जाना लगा रहा मगर इस विषय पर आज तक किसी ने भी ध्यान नहीं दिया इस बारे में ज़िलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह का यह प्रयास सराहनीय है।उन्होंने कहा कोई शक्ति है जो मुझे इस कार्य को करने के लिए प्रेरित कर रही है । उन्होंने प्रण कर लिया है कि पं राधेश्याम कथा वाचक की विलुप्त हो रही ख्याति को नई पहचान देकर समाज को लोगों को उनके योगदान के बारे में स्मरण करवाते रहेंगे ।
ज्ञात रहे : 25 नवम्बर, 1890 को उत्तर प्रदेश में बरेली के बिहारीपुर गली कामारथियान मोहल्ले में पिता पंडित बांकेलाल के घर में उनका जन्म हुआ तो।

Input any:Vivek Singh

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