बरेली-आज़ाद हवा में साँस लेंगे सेंट्रल जेल के 31 क़ैदी,दयायाचिका के आधार पर समयपूर्व रिहाई के निर्देश

बरेली की केंद्रीय कारागार में ऐसे बुजुर्ग बंदियों के लिए राहत की खबर है जिन्होने 14 वर्ष या 18 वर्षी की सजा काट ली हो। बंदियों की रिहाई प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है । सेंट्रल जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि रिहाई की जो प्रारंभिक शर्तें हैं उसमें सभी बुजुर्ग बंदियों को तो रिहाई नहीं मिलेगी, परन्तु जो बुजुर्ग अपनी सजा के 14 वर्ष या फिर 18 वर्ष से ज्यादा सजा काट चुके हैं, उन्हें अलग-अलग उम्र सीमा में रखकर रिहाई प्रक्रिया पर कार्य करने के लिए कहा गया है। कारागारों में लंबे समय से बंद उम्रदराज व अशक्त कैदियों की दया याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर नियमानुसार विचार किये जाने के निर्देश प्रमुख सचिव अरविंद कुमार से मिले है। ऐसे सिद्धदोषबंदी जिनकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है तथा जो 14 वर्ष या उससे अधिक सजा काट चुके हैं। दूसरे कटेगरी में ऐसे सिद्धदोष बंदी जिनकी आयु 70 वर्ष या उससे अधिक हो परन्तु 80 वर्ष से कम है तथा जो 18 वर्ष या उससे अधिक सजा काट चुके हैं। उक्त दोनों प्रकार के सिद्ध दोषवृद्ध बंदियों की दयायाचिका के आधार पर समयपूर्व रिहाई के प्रस्ताव महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं उप्र लखनऊ को उपलब्ध करवा दिये गए है। जेल अधीक्षक ए.के.सागर ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि केंद्रीय कारागार बरेली में लगभग इकतीस बुजुर्ग बंदियोंकी हो सकती है रिहाई यहाँ केन्द्रीय कारागार में 14 वर्ष से ज्यादा की सजा काटने वाले बंदियों की संख्या 31 हैं। बुजुर्ग बंदियों की बात करें तो यहां सजा काटरहे 70 से 79 वर्ष के 21 बंदी तथा 80 से 102 वर्ष तक के 11 बंदी कारागार में बंद हैं। हालांकि प्रमुख सचिव द्वारा जारी दो बिन्दुओं को दृष्टिगत रखा जाय तो लगभग यहाँ केंद्रीय कारागार के 31 बुजुर्ग बंदी इस कटेगरी में आ सकते हैं।

Input By:Vivek Singh

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