क्या होता है जीडीपी, क्या है जो जानना चाहिए।

Yash Purohit, (Civil Services Aspirant)

किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान या फिर अक्सर न्यूज में और अखबारों में,  जीडीपी शब्द आपको अक्सर पड़ने मैं या सुनने में आता होगा और हाल ही में आपने एक खबर देखी होगी कि
वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही
में 7.2 फीसद की जीडीपी वृद्धि के साथ
भारत ने चीन( 6.8 फीसद) को पछाड़कर
विश्व की सबसे तेज विकास दर वाली
अर्थव्यवस्था का तमगा फिर हासिल
कर लिया है। इसका अर्थ
क्या है इसमें वृद्धि या गिरावट के मतलब
क्या हैं? आज मैं आपको Fastupnews.com पर ऐसी ही आर्थिक शब्दावली को समझाने का प्रयास करूंंगा। जीडीपी के साथ आज हम इसकी
सकल घरेलू उत्पाद किसी देश
में एक साल में कृषि उद्योग और सेवाओं
के रूप में कितना उत्पादन हुआ? उसकी
आर्थिक स्थिति कैसी है? यह जानने का
प्रचलित तरीका सकल घरेलू उत्पाद (ग्रॉस
डोमेस्टिक प्रॉडक्ट) यानी जीडीपी है।

जीडीपी — किसी देश में एक निश्चित अवधि में
उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक
मूल्य (रुपये के हिसाब से मूल्य) को
जीडीपी कहते हैं। हालांकि जीडीपी का
आकलन करते वक्त सकल मूल्य वर्द्धन
यानी जीवीए में टैक्स को जोड़ दिया जाता
है और इसमें से सब्सिडी को घटा दिया
जाता है। जीडीपी दो प्रकार से व्यक्त होता
है-प्रचलित मूल्य यानी वर्तमान कीमतों
पर और स्थायी मूल्य यानी आधार वर्ष
पर (जैसे 2011-12 के मूल्य स्तर पर)।
उसमें से मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटा दिया
जीडीपी जब स्थायी मूल्यों पर होता है तो
जाता है। इसलिए जब किसी तिमाही या वर्ष
में जीडीपी वृद्धिस्थायी मूल्यों पर व्यक्त की
जाती है, तो उसे ‘विकास दर’ कहते हैं।
(यूएनएसएनए) के तहत सभी देश राष्ट्रीय
उत्पादन या राष्ट्रीय आय की गणना के लिए
जीडीपी का तरीका अपनाते हैं। हमारे देश में
संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय लेखा प्रणाली
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ)
जीपी की गणना करता है। जीडीपी गणना
तीन आधार- उत्पादन, आय और व्यय पर
होती है। सोएसओ के मुताबिक, ‘जीडीपी
एक संदर्भ अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए
सभी निवासी उत्पादक इकाइयों के सकल
मूल्य वर्धन (जीवीए) का कुल योग है। जीडीपी को समझने के लिए ‘संदर्भ अवधि’, ‘निवासी उत्पादक इकाइयाँ’ और ‘जीवीए’ को समझना जरूरी है।

  • संदर्भ अवधि से आशय तिमाही या वित्त
    वर्ष से है, जो एक अप्रैल से अगले साल 31
    मार्च तक होता है। वित्त वर्ष चार तिमाहियों
    अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर, अक्टूबर
    से दिसंबर और जनवरी से मार्च तक होता
    है और प्रत्येक तिमाही के लिए जीडीपी के
    अलग आंकड़े आते हैं। उदाहरण के लिए
    28 फरवरी को जीडीपी में 7.2 प्रतिशत
    वृद्धि का जो आंकड़ा सीएसओ ने जारी
    किया वह चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही
    (अक्टूबर-दिसंबर) का था। इस तरह इसमें
    संदर्भ अवधि तीसरी तिमाही की। जीडीपी में
    वृद्धि का यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2017-18
    की तीसरी तिमाही के जीडीपी की तुलना
    वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के
    जीडीपी से करके ज्ञात किया गया। इसका
    मतलब यह हुआ कि अगर आप इस साल
    किसी तिमाही के जीडीपी वृद्धि के आंकड़े
    पर गौर कर रहे हैं तो उसकी तुलना पिछले
    साल की समान तिमाही से ही करनी होगी
    क्योंकि पूर्व तिमाही से तुलना करने पर विसंगति आ जाती है।
  • अब हम निवासी उत्पादन इकाइयों  का
    अर्थ समझते हैं। दरअसल जब व्यक्ति या
    कंपनी भारत में छह माह से अधिक रहते
    हैं और उनका मुख्यतः आर्थिक हित भारत
    में ही है तो उन्हें निवासी इकाइयां माना जाता
    है। यहां यह जानना जरूरी है कि निवासी
    उत्पादन इकाई की परिभाषा में आने के लिए
    भारतीय नागरिक या भारतीय कंपनी होना
    जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई
    अमेरिकी कंपनी भारत में अपना कारखाना
    लगाती है, तो उसका उत्पादन भारत के
    जीडीपी में शामिल होगा।
  • अब हम ‘जीवीए‘ को समझते हैं क्योंकि
    जीवीए में टैक्स को जोड़ने और सब्सिडी को
    घटाने पर ही जीडीपी का आंकड़ा प्राप्त होता
    है। जब किसी उत्पाद के मूल्य से उसकी
    इनपुट लागत को घटा दिया जाता है तो जो
    राशि बनती है उसे जीवीए कहते हैं। जैसे,
    अगर कोई कंपनी 20 रुपये में ब्रेड का पैकेट
    बेचती है और इसे बनाने में 16 रुपये का
    इनपुट इस्तेमाल होता है तो उस स्थिति में
    जीवीए चार रुपये माना जाएगा। इस तरह
    भारत में अर्थव्यवस्था के तीन सेक्टर
    प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक को
    मुख्यतः आठ क्षेत्रवार समूहों में विभाजित
    कर जीवीए का अनुमान लगाया जाता है।

 

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