मुज़फ्फरनगर – शौचालय पर घोटाला भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगा रहे अधिकारी

मुज़फ्फरनगर में पुरकाजी ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत के गांव महरायपुर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए शौचालयो में धांधली का मामला सामने आया है। जहाँ पर 150 शौचालय बनाये जाने थे। मगर इन 150 शौचालयो में से केवल 71 शौचालय ही जाँच में सही पाये गए है । ग्रामीणों का आरोप है की मौजूदा प्रधान ने बीडीओ और सचिव की मिली भगत से शौचालय बनाने में भारी घोटाला किया है । गांव में बिना गड्ढे के ही शौचालय बनाये गए है और मानक के अनुसार सामग्री भी नहीं लगाई गई है। वही मुख्य विकास अधिकारी इस पुरे ,मामले  में जांच कराने के बाद दोषी पाये जाने पर कार्यवाही की बात कह रहे है।

  स्वच्छ भारत मिशन के तहत सन 2017-18 में उत्तरप्रदेश के जनपद मुज़फ्फरनगर में 498 ग्राम पंचायतो के गावो में 53 हजार शौचालय बनाये जाने थे , मुख्य विकास अधिकारी अंकित अग्रवाल के अनुसार 53 हजार शौचालय का टारगेट पूरा किया जा चुका है लेकिन जब इसकी जाँच कराई गई तो जाँच में 250 ग्राम पंचायतो के गावो में बनाये गए शौचालय मानकों के अनुसार पुरे नहीं पाए गए।  जिन्हे दोबारा बनाने के आदेश कर दिए गए है। आपको दिखते है किस तरह सरकारी मशीनरी के कर्मचारी और अधिकारियो के साथ मिलकर ग्राम पंचायतो के सदस्य और ग्राम प्रधान भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगा रहे है। हम बात बात कर रहे है मुज़फ्फरनगर के पुरकाजी ब्लॉक की ग्राम पंचायत के गांव महरायपुर की जहाँ ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत कर्मचारियों ने मिलकर शौचालय बनवाने में ऐसा घोटाला किया की ग्राम पंचायत की लिस्ट में पात्र ग्रामीणों के शौचालय ना बनवाकर अन्य ग्रामीणों के शौचालय बनवा डाले , और जो शौचालय इस गांव में बने है उनके हालात इस घोटाले को खुद बया कर रहे है।  शिकायतकर्ता विजय पाल पूर्व ग्राम प्रधान ने बताया की हमारे गांव में शौचालयो को लेकर ये मेटर तूल पकड़ रहा है। हम लोग इसमें करीब डेढ़ वर्ष से लगे हुए है। 2015-2016 में लगभग 19 लाख 32 हज़ार रूपये शौचालयो का आया था। उसमे जिन शौचालयों का निर्माण कराया गया है उसमे किसी भी लाभार्थी के खाते में कोई पैसा नहीं आया है। और इस शौचालयों के मसले में गाँव के अपात्र लोगो के शौचालय तो बने मगर जो पात्र थे उनका कोई शौचालय नहीं बनाया गया। मानक के हिसाब से शौचालय बनने चाहिए थे जो सरकार की मंशा थी उसपर भी पानी फेर दिया गया। अपनी हटधर्मी और मनमर्जी के चलते प्रधान ने तानाशाही दर्शाते हुए ऐसा किया है जिसमे सचिव और प्रधान लिप्त है। और अधिकारी भी इसमें लीपापोती करने में काफी प्रयास में है। हमने माननीय डीएम साहब और सीडीओ साहब से भी शिकायत की थी जिसमे सीडीओ साहब ने हमे 1 साल में ये सूची दी है। जिसके बाद हमे पता चला की जो हमारे पात्र लोग है उनका नाम तो है लेकिन उनके यह आज भी शौचालय नहीं है। करीब 8 इस सूचि में ऐसे नाम है जो फिलहाल सरकारी नौकरी पर है। उनके नाम शौचालय है और पैसे भी निकाल लिए गए है। हमारे गाँव में कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं है ये केवल हिन्दुओ का गाँव है। लेकिन सूची में 7 मुस्लिम परिवार भी दर्शाये गए है। और उनका 12 हज़ार रूपये भी  का निकल रखा है। और जो मर्तक है उनके नाम से भी शौचालय बनाये हुए है। और एक जो ब्रजपाल S/O हुकुमचंद है वो प्रधान का पिता है। इसमें जो मुख्य घोटाला करने वाला सचिव है हम ये ही चाहते है की गरीब आदमी का हक गरीब को मिले और  जो मंसा है जो सरकार चाहती है वो धरातल पर हो लेकिन सरकारी अधिकारी उसमे पानी फेरने का काम कर रहे है। इसमें पूर्ण रूप से पतीला लगा रखा है। वही इस गांव में अपने घर में शौचालय की मांग करने वाली महिला कविता का आरोप है की हमारा सूची में नाम है लेकिन शौचालय नहीं बना है। शिकायत भी की लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। दो परिवारों की नहीं बन रही।  हमारे नाम जा रहे है इसीलिए शौचालय बनने चाहिए। अधिकारी देखकर चले जाते है लेकिन कोई कुछ नहीं करता। हम तो ये ही कहते है जो प्रधान है उसपर कार्यवाही होनी चाहिए। इस पुरे घोटाले पर जब मौजूदा प्रधान आदित्य से बात की गई तो वो भी खुद अपनी सफाई में घुमा फिरकर इस घोटाले को स्वीकार कर रहे है आइये आप भी सुनिए उनकी जुबानी इस घोटाले की कहानी पूरा मामला ये है की मेरे यहां जो 2011 की जनगणना थी उसके अनुसार एक सो पचास शौचालयों का पैसा आया था। और मेने पूरे एक सो पचास शौचालय बनवा दिए थे। कुछ लोग मेरे विपक्ष के है जिनके यहां में शौचालय बनवाने के लिए गया भी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जिसमे की जो गरीब परिवार लिस्ट में भी नहीं थे मेने उनके भी शौचालय बनवा दिए थे। मेरे पास 2011 की सूची थी उनकी मौत हुई हो या नहीं उनके घर पर तो है कोई न कोई। मेरे गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है और न ही उनका सूची में कोई नाम आया था नहीं किसी का कोई पैसा नहीं आया और न ही किसी भी मुस्लिम परिवार का शौचालय बना। जिन 23 परिवारों के शौचालय नहीं बने है उन्होंने खुद मना कर दिया था बनवाने के लिए मेने मिस्त्री को भी भेजा था उन्होंने उसके साथ भी मारपीट की थी। जिसमे मिस्त्री ने छपार थाने में ऍफ़ आई आर भी की थी। 2011 की सूची के बाद कोई सरकारी नौकर बन गया या नहीं बना मेरे पास जो लिस्ट थी क्योकि मुझे तो सबके बनवाने थे। हमे क्या जरुरत है ये करने की समाज का पैसा है समाज में लगा रहे है। आप ने देखा भी होगा में कैसे कार्य कर रहा हु। और दो साल पहले मेने जो शौचालय बनवाए थे वो भी गाँव वालो ने मकान बनाते समय तुड़वा दिए अब में कब तक उनकी मर्रमत कराता रहु। ये तो मिस्त्री को पता मुझे नहीं पता……..मेने सभी के यहाँ सिल्ली वाली छत डाली हुई है। उसमे कुछ सीमेंट की भी है। पत्थर कम रह गया था इसीलिए मेने सोचा बारिश का मौसम है तो जल्दी की वजह से मेने कुछ शौचालयो के लिए सीमेंट की मंगा ली थी। ज्यादा नहीं थी वो 5-7 ही थी,,,,,,वही इस घोटाले की प्रशासनिक अधिकारियो को शिकायत होने पर मुख्य विकास अधिकारी अंकित अग्रवाल ने बताया की हमारे टोटल 498 ग्राम पंचायते है इस पुरे जनपद में इसमें हमारा इस साल का जो टारगेट था 53 हज़ार शौचालयों का निर्माण इसमें कराया गया है। जिसकी रिपोर्ट ग्राम पंचायत के द्वारा भेजी गई है। सभी ग्राम पंचायतो द्वारा खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है इस जनपद में खुले में शौच घोषित करने की प्रक्रिया है की सर्वप्रथम ग्राम पंचायत अपने शौचालयों का निर्माण कराती है। उसके बाद पाने आप को खुले में शौच मुक्त घोषित करती है जब उनके द्वारा शौच मुक्त घोषित कर दिया जाता है तब जिला स्तर से टीम गठित की जाती है। फिर उसका सत्यापन कराया जाता है की वाकई ग्रामपंचायत खुले में जो शौचमुक्त घोषित की गई है वो सही है या नहीं है। इसमें हमारा सत्यापन का काम अभी चल रहा है जिसमे लगभग 250 ग्राम पंचायत हमारी ऐसी है जिनको सत्यापन के बाद फ़ैल किया गया है कई शौचालय है जिनमे कमी पाई गई है। कहि शौचालय कम बनाये गए थे तो कही पात्र व्यक्ति छूट गए थे जिस कारण उनको फ़ैल किया गया है। और दोबारा से उनको शौचालय कम्प्लीट कराने के लिए आदेशित किया गया है। ग्राम महराय पुर की शिकायत लगभग दो हफ्ते पहले प्राप्त हुई थी इस शिकायत में मेरे द्वारा डीपी आर ओ को निर्देशित किया गया था की वो स्वम् जाकर वह पर बने शौचालयों की जाँच करे। उन्होंने वह पर लगभग सौ शौचालयों की जाँच की जिसमे की 71 शौचालय सही पाए गए और 6 शौचालय ऐसे पाए गए है जो बनवाये नहीं गए। और 23 शौचालय ऐसे पाए गए है की वो बनवाये तो है लेकिन उनका नाम कोई और प्रदर्शित किया गया है ग्राम पंचायत से जो नाम दिए गए है वो किसी और के है और बने किसी और के है। इसके क्रम में डीपी आर ओ के द्वारा नोटिस जारी किया गया है सचिव को और ग्राम प्रधान को जिसने अभी तक उनका जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। 25 तारिक के बाद इस मामले में कार्यवाही की जाएगी। अगर इसमें कोई भी धांधली पाई जाती है तो सख्त और विधिक कार्यवाही की जाएगी और जो भी हमारा एक्ट है उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

 आदित्य (ग्राम प्रधान)= पूरा मामला ये है की मेरे यहां जो 2011 की जनगणना थी उसके अनुसार एक सो पचास शौचालयों का पैसा आया था। और मेने पूरे एक सो पचास शौचालय बनवा दिए थे। कुछ लोग मेरे विपक्ष के है जिनके यहां में शौचालय बनवाने के लिए गया भी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जिसमे की जो गरीब परिवार लिस्ट में भी नहीं थे मेने उनके भी शौचालय बनवा दिए थे। मेरे पास 2011 की सूची थी उनकी मौत हुई हो या नहीं उनके घर पर तो है कोई न कोई। मेरे गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है और न ही उनका सूची में कोई नाम आया था नहीं किसी का कोई पैसा नहीं आया और न ही किसी भी मुस्लिम परिवार का शौचालय बना। जिन 23 परिवारों के शौचालय नहीं बने है उन्होंने खुद मना कर दिया था बनवाने के लिए मेने मिस्त्री को भी भेजा था उन्होंने उसके साथ भी मारपीट की थी। जिसमे मिस्त्री ने छपार थाने में ऍफ़ आई आर भी की थी। 2011 की सूची के बाद कोई सरकारी बन गया या नहीं बना मेरे पास जो लिस्ट थी क्योकि मुझे तो सबके बनवाने थे। हमे क्या जरुरत है ये करने की समाज का पैसा है समाज में लगा रहे है। आप ने देखा भी होगा में कैसे कार्य कर रहा हु। और दो साल पहले मेने जो शौचालय बनवाए थे वो भी गाँव वालो ने मकान बनाते समय तुड़वा दिए अब में कब तक उनकी मर्रमत कराता रहु। ये तो मिस्त्री को पता मुझे नहीं पता……..मेने सभी के यह सिल्ली वाली छत डाली हुई है। उसमे कुछ सीमेंट की भी है। पत्थर कम रह गया था इसीलिए मेने सोचा बारिश का मौसम है तो जल्दी की वजह से मेने कुछ शौचालयोके लिए सीमेंट की मंगा ली थी। ज्यादा नहीं थी वो 5-7 ही थी,,,,,,

 

 
 
ब्रिजेश (ग्रामीण)= समस्या ये है की हमारे गाँव में एक सो इकसठ शौचालय है जिनमे से केवल इक्यावन शौचालय धरातल पर है बाकि के शौचालय हवा में बने हुए है। कारण ये ही की हमारे यह के सचिव और प्रधान ने घोटाला किया है। जो पात्र है उनके तो शौचालय बने ही नहीं जो अपात्र है उन्ही के बने हुए है। हमने अधिकारियो से इसकी शिकायत भी की थी अफेडेबिट भी दिए थे वो आये भी है जाँच के लिए लेकिन पैसा लेकर चले जाते है। और हमारे चार शौचालय थे वो भी हवा में बना दिए प्रधान जी ने और सूची में नाम है और ऐसे 23 नाम है जिनके नाम है। और 7 मुस्लिम नाम है जो सूची में है जबकि हमारे गाँव में एक भी मुस्लिम घर नहीं है। हम ये कहते है की सचिव और प्रधान के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। 

 
कविता (शौचालय की मांग करने वाली) = हमारा सूची में नाम है लेकिन शौचालय नहीं बना है। शिकायत भी की लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। दो परिवारों की नहीं बन रही।  हमारे नाम जा रहे है इसीलिए शौचालय बनने चाहिए। अधिकारी देखकर चले जाते है लेकिन कोई कुछ नहीं करता। हम तो ये ही कहते है जो प्रधान है उसपर कार्यवाही होनी चाहिए।
 
 
 
 विजय पाल (पूर्व ग्राम प्रधान)= हमारे गांव में शौचालयो को लेकर ये मेटर तूल पकड़ रहा है। हम लोग इसमें करीब डेढ़ वर्ष से लगे हुए है। 2015-2016 में लगभग 19 लाख 32 हज़ार रूपये शौचालयो का आया था। उसमे जिन शौचालयों का निर्माण कराया गया है उसमे किसी भी लाभार्थी के खाते में कोई पैसा नहीं आया है। और इस शौचालयों के मसले में गाँव के अपात्र लोगो के शौचालय तो बने मगर जो पात्र थे उनका कोई शौचालय नहीं बनाया गया। मानक के हिसाब से शौचालय बनने चाहिए थे जो सरकार की मंशा थी उसपर भी पानी फेर दिया गया। अपनी हटधर्मी और मनमर्जी के चलते प्रधान ने तानाशाही दर्शाते हुए ऐसा किया है जिसमे सचिव और प्रधान लिप्त है। और अधिकारी भी इसमें लीपापोती करने में काफी प्रयास में है। हमने माननीय डीएम साहब और सीडीओ साहब से भी शिकायत की थी जिसमे सीडीओ साहब ने हमे 1 साल में ये सूची दी है। जिसके बाद हमे पता चला की जो हमारे पात्र लोग है उनका नाम तो है लेकिन उनके यह आज भी शौचालय नहीं है। करीब 8 इस सूचि में ऐसे नाम है जो फिलहाल सरकारी नौकरी पर है। उनके नाम शौचालय है और पैसे भी निकाल लिए गए है। हमारे गाँव में कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं है ये केवल हिन्दुओ का गाँव है। लेकिन सूची में 7 मुस्लिम परिवार भी दर्शाये गए है। और उनका 12 हज़ार रूपये भी  का निकल रखा है। और जो मर्तक है उनके नाम से भी शौचालय बनाये हुए है। और एक जो ब्रजपाल S/O हुकुमचंद है वो प्रधान का पिता है। इसमें जो मुख्य घोटाला करने वाला सचिव है हम ये ही चाहते है की गरीब आदमी का हक गरीब को मिले और  जो मंसा है जो सरकार चाहती है वो धरातल पर हो लेकिन सरकारी अधिकारी उसमे पानी फेरने का काम कर रहे है। इसमें पूर्ण रूप से पतीला लगा रखा है।
 

 
अंकित अग्रवाल (सी डी ओ )हमारे टोटल 498 ग्राम पंचायते है इस पुरे जनपद में इसमें हमारा इस साल का जो टारगेट था 53 हज़ार शौचालयों का निर्माण इसमें कराया गया है। जिसकी रिपोर्ट ग्राम पंचायत के द्वारा भेजी गई है। सभी ग्राम पंचायतो द्वारा खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है इस जनपद में खुले में शौच घोषित करने की प्रक्रिया है की सर्वप्रथम ग्राम पंचायत अपने शौचालयों का निर्माण कराती है। उसके बाद पाने आप को खुले में शौच मुक्त घोषित करती है जब उनके द्वारा शौच मुक्त घोषित कर दिया जाता है तब जिला स्तर से टीम गठित की जाती है। फिर उसका सत्यापन कराया जाता है की वाकई ग्रामपंचायत खुले में जो शौचमुक्त घोषित की गई है वो सही है या नहीं है। इसमें हमारा सत्यापन का काम अभी चल रहा है जिसमे लगभग 250 ग्राम पंचायत हमारी ऐसी है जिनको सत्यापन के बाद फ़ैल किया गया है कई शौचालय है जिनमे कमी पाई गई है। कहि शौचालय कम बनाये गए थे तो कही पात्र व्यक्ति छूट गए थे जिस कारण उनको फ़ैल किया गया है। और दोबारा से उनको शौचालय कम्प्लीट कराने के लिए आदेशित किया गया है। ग्राम महराय पुर की शिकायत लगभग दो हफ्ते पहले प्राप्त हुई थी इस शिकायत में मेरे द्वारा डीपी आर ओ को निर्देशित किया गया था की वो स्वम् जाकर वह पर बने शौचालयों की जाँच करे। उन्होंने वह पर लगभग सौ शौचालयों की जाँच की जिसमे की 71 शौचालय सही पाए गए और 6 शौचालय ऐसे पाए गए है जो बनवाये नहीं गए। और 23 शौचालय ऐसे पाए गए है की वो बनवाये तो है लेकिन उनका नाम कोई और प्रदर्शित किया गया है ग्राम पंचायत से जो नाम दिए गए है वो किसी और के है और बने किसी और के है। इसके क्रम में डीपी आर ओ के द्वारा नोटिस जारी किया गया है सचिव को और ग्राम प्रधान को जिसने अभी तक उनका जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। 25 तारिक के बाद इस मामले में कार्यवाही की जाएगी। अगर इसमें कोई भी धांधली पाई जाती है तो सख्त और विधिक कार्यवाही की जाएगी और जो भी हमारा एक्ट है उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी। 
INPUT BY KOMAL SHARMA

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