वैलेंटाइन डे स्पेशल: मुरादाबाद में भी है ताजमहल

मुरादाबाद : मैने शाहो की मौहब्बत का भ्रम तोड़ दिया, मैने भी घर पर ताज महल बना रखा है.जी हाँ शहंशाह शाहजहाँ द्वारा बनवायी गयी मौहब्बत की निशानी आगरा हाइवे पर बसे कस्बा कुन्दरकी में भी है.बस फर्क इतना है जनाब कि ताज महल को शहंशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था. और कुन्दरकी में बना ताज महल ग्राम रुपपुर निवासी छिददा खरसाली ने अपनी बेगम को तोहफे में दिया था.

कुन्दरकी में रहने वाले छिददा खरसाली ने सन् 1969 में अपनी बेगम को तोहफा देने के लिये उन्होने अपने मकान की छत पर ताज महल बनवाया था.

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ताज महल को दुनिया भर में महोब्बत का प्रतीक माना जाता है शायद इसी  से प्रभावित होकर रूपपुर निवासी छिद्दा खरसाली ने अपने मकान पर अपनी बेगम की महोब्बत में ताज महल का माडल बना दिया.

जिसके बाद इस ताज की शोहरत फैलने लगी.इस ताजमहल की शोहरत को सुन ताज महल संरक्षण  विभाग के अधिकारी इस ताज महल को देखने आए.अब ताज हमल की वजह से ही ब्लाक कार्यालय के निकट ताजमहल के नाम से एक मौहल्ला भी जाना जाने लगा है.

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इस ताज की खासियत के चलते गाडियो के स्टाँपिज भी बन गये है.अब तो बस स्टैड पर भी रिक्शा वाले ताजमहल ताजमहल की आवाज लगाते नजर आते है.

सफर  के दौरान यात्री भी ताजमहल पर रुकने को कहते है. छिददा खरसाली की भी मृत्यु हो चुकी है।स्थानीय लोग कहते हैं कि धन्य है छिद्दा खरसाली जो  मकान पर ताज बना कर अपनी मौहब्बत को आबाद कर गये.कुन्दरकी का नाम रोशन कर गये.अब स्थिति यह बन चुकी है कि आते जाते यात्री अपनी गाडी रोक कर इस ताज महल को देखते है.और कुंदरकी  शाहजहाँ  को याद करते हैं 
Input By: Sahriq Siddiqui

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