अलीगढ – देखे -शिवरात्रि स्पेशल- शिवपुत्र कार्तिके द्वारा स्थापित शिवलिंग आज भी हैं मौजूद

अलीगढ में शिवपुत्र कार्तिके द्वारा स्थापित शिवलिंग आज भी हैं मौजूद।शिवरात्रि स्पेशल

अलीगढ़ में जिला मुख्यालय से करीब 28 किमी दूर बसे पाताल खेड़िया गॉव में भगवान शिव का ऐसा प्राचीन मंदिर यहाँ एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन शिव लिंग विराजमान है। तीनों शिव लिंगो की गहराई को आज तक कोई नहीं माप सका है। मान्यता है कि इन शिव लिंगो की स्थापना महादेव शिवजी के पुत्र कार्तिके ने कराया था, इतिहास के पन्नो मे भी इन शिव लिंगो का जिक्र है। यहाँ महाशिव रात्रि के दिन दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते है। पेश है अलीगढ़ से सवाददाता मुकेश गुप्ता की खास रिपोर्ट।

-अलीगढ कइलस इलाके के गाँव पाताल खेडिया मे शिव जी की जो तीन-तीन शिव लिंग है उनका जिक्र वेद-पुराणों मे स्पष्ट उल्लेख है। पुराणों मे इस मंदिर को भोलेनाथ की गुप्त तीर्थस्थल के नाम से जाना जाता है, मान्यता है कि भोले भण्डारी शिव अपने भक्तो के हर संकट से उवारते है, मुश्किल घड़ी मे उन्हे राह भी दिखाते है इसी लिए देवता भी अपने कष्टो के निवारण के लिए भगवान भोले की पूजा करते थे। इसी लिए महाशिव रात्रि पर देश भर मे शिव की पूजा होती है। हालांकि देश भर मे भोले जी के कई मंदिर है लेकिन जिसे पुराणों मे गुप्त तीर्थ स्थल के नाम से जाना जाता है वह अलीगढ़ के पाताल खेडिया मे स्थित यही शिव मंदिर है,

इस प्राचीन गुप्त स्थल के पुजारी मोहन गिरि महाराज ने बताया कि शिव के बेटे कार्तिके ने यहाँ विराजमान तीनों शिव लिंगो की स्थापना उन्होने इस बात का प्राश्चित करने के लिए विश्वकर्मा से कराया था कि उन्होने शिव भक्त राक्षस तड़कासुर का वध कर दिया था। शिव भक्त की हत्या का प्राश्चित करने के लिए कार्तिके ने विश्वकर्मा से तीन शिवलिंगों का निर्माण कराया। ये तीनो शिव लिंग कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर, और कपालेश्वर के नाम से शिव पुराण, स्कंदपुराण और भागवत व विश्वकर्मा पुराण मे भी उल्लेखित है। यह तीनों ही शिव लिंग जमीन से निकले हुये है। इन शिव लिंगो की गहराई को आज तक कोई नहीं माप सका है। हर शिव लिंग की ऊंचाई करीब 4.5 फुट है


–अलीगढ से 28 किमी दूर बसे पाताल खेड़िया गॉव में स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर यूं ही ऐतिहासिक नहीं है यहाँ और भी कई खास बात है। जब बच्चे रोते है तो अक्सर बुजुर्ग यह कहते है कि इसे भै-माता रुला रही है। लेकिन भै-माता का पूरे भारत मे कोई मंदिर-मूर्ति नहीं है। लोगो का मानना है कि पूरे भारत वर्ष मे भै-माता का एकमात्र यही मंदिर है। यहाँ भै-माता की मूर्ति शिव पुत्र कार्तिकेय ने कुमारेश्वर शिव लिंग स्थापना के साथ ही स्थापित की थी। दूर-दूर से आने वाले शिव भक्तो को यहाँ भै-माता के दर्शनों का लाभ भी मिलता है। मान्यता है कि पाताल खेडिया नामक इस जगह का जिक्र भी कई जगह पुराणों मे मिलता है। यहाँ स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पीछे एक तलाब भी है, इस तालाब को पार्वती सरोवर के नाम से जाना जाता है। मंदिर के पुजारी मोहन गिरि बताते है कि यह गुप्त तीर्थ स्थल है, कार्तिकेय ने शिवलिंगों के साथ विश्वकर्मा से एक सरोवर भी बनवाया था, शिव लिंगो की स्थापना से पूर्व कार्तिके ने सभी तीर्थों को सरोवर मे प्रकट किया था। इसी सरोवर मे स्नान करने के बाद कार्तिके ने भगवान शिव की पूजा कर प्राश्चित किया था। मान्यता है कि इस सरोर मे स्नान करने से सभी तीर्थों का पुण्य प्रपट होता है। इस तलाब मे कई विदेशी पक्षी जल पीने भी आते है।

अलीगढ़-मथुरा मार्ग पर स्थित पाताल खेडिया गाँव मे स्थित इस गुप्त तीर्थ स्थल पर तीनों शिव लिंगो की स्थापना द्वापर युग मे शिव के पुत्र कार्तिके द्वारा कराई गयी थी। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से प्रार्थना पर हर मनोकामना पूरी होती है। इसी लिए महाशिव रात्री पर यहाँ दूर-दूर से शिव भक्त दर्शन के लिए आते है। वहीँ मंदिर के पीछे एक गुफा भी है, जो कि मंदिर क पुनः निर्माण का वक्त तैयार हुई है, हालांकि फ़िलहाल उसका काम रुका हुआ है।

-इस ऐतिहासिक गुप्त तीर्थ स्थल पर शिव भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए जरूर आते है, इतना ही नहीं महाशिवरात्री पर यहाँ मेला भी लगता है। लेकिन इस मंदिर की हालत बहुत ही बदहाल है। देखरेख के आभाव मे इस मंदिर का महत्व कम होता जा रहा है। कई पुराणों मे दर्ज इस तीर्थ स्थल को आज तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। मंदिर के उत्थान के लिए ग्राम पंचायत स्तर से भी कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया है। हालांकि कई बार इसे तीर्थ स्थल घोषित करने के बाबत पुरातत्व विभाग की ओर से सर्वे किए गए। पुरातत्व विभाग ने भी इसे प्राचीन मंदिर माना लेकिन यहाँ कुछ विशेष नहीं हो पाया। स्थानीय ग्राम प्रधानपति संजय चौधरी का कहना है कि मंदिर काफी प्राचीन है,

लेकिन मंदिर की देख रेख का जिम्मा कोई सरकारी संगठन अपने संरक्षण मे ले ले तो यह प्राचीन धरोहर विलुप्त होने से बच सकती है। मंदिर मे कई पुराने ग्रंथ थी है, जिनमे इस जगह का प्रमाण का उल्लेख है उनको भी संरक्षित करने की जरूरत है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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