सीतापुर- शौचालय से अनजान यह गाँव, नहीं जानते PM और CM का नाम

सीतापुर  –देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है की घर – घर शौचालय हो. लोग घर के बाहर खास कर महिलाए खुले में शौंच के लिए न जाएँ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए भारत स्वछता अभियान की शुरुवात की थी. और घर – घर लोगो को जोड़ने के लिए देश मे एक मुहिम चलाई हुई है. इस मुहिम के लिए अरबों रुपए खर्च किया जा रहा है. लेकिन यूपी के सीतापुर में एक गांव ऐसा है. जहा लोग देश के प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी का नाम तक नहीं जानते. लोग तो ये भी नहीं जानते की शौचालय होता कैसा है. ये वही गाँव है जहां 50 सालों से एक भी शौचालय नही बना है. इसी गांव की 1500 की आबादी के लोग खुले में शौंच के लिए जाने को मजबूर है. गांव में शौचालय न होने की वजह से लोगो के रिश्ते तक वापस लौट गए है. अजीब बात तो ये है कि आज तक यहां कोई अधिकारी तक नही आया. जब सीतापुर के अधिकारियो से पुछा तो उनको भी इस गाँव के बारे में सुनकर बड़ा अजीब लगा. और उन्होंने टीम भेज कर जांच के बाद विकास की बात कही है. 

 

उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों में न जाने कितने मुख्यमंत्री आये और गए. इतना ही नहीं चुनाव में कुछ पार्टयाँ अपने आप को दलितों का मसीहा बता कर उनके वोट बैंक हासिल करती रही. और सरकारें बनती रहीं. लेकिन आज भी सीतापुर मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर सड़क पर बने दलितों के पलारिहा गांव की तरफ धयान तक नही दिया. ऐसा क्यों हुआ, इसका पता नही, लेकिन ये सच है कि ये गांव पिसावा ब्लाक से केवल 4 किलोमीटर पर है. इस गांव में 130 घर है. 1326 आबादी वाले इस गांव में 900 के करीब दलित बिरादरी के लोग रहते है.

इतनी बड़ी आबादी वाले इस गांव में आज तक एक भी शौंचालय नही बना. यही वजह है की गाँव की सभी महिलायें और पुरुष गाँव के बाहर बने गन्ने के खेतों में शौंच के लिए जाते है. महिलायों के साथ कोई घटना न हो इसके लिए वो सभी एक साथ भारी संख्या में शंच के लिए जाती है. वजह है गाँव में शौचालय का निर्माण न होना. यही वजह है की गाँव की महिलाएं ये तक नहीं जानती की शौचालय देखने में होता कैसा है. इतना ही नहीं वो देश के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं जानती. 

 इसी गाँव के एक बुज़ुर्ग पूर्व प्रधान शिव चरण से बात की गयी तो उनका कहना था की मैंने अपने कार्यकाल में महिलाओ के लिए 20 साल पहले ईंट की चार दीवारी वाले 1 छोटा सा सार्वजनिक शौचालय अपने पैसों से बनवाया था. जो 15 साल पहले ही पूरी तरह टूट चूका है. ख़त्म हो चूका है. अब वो जंगल की शक्ल में है. उसके बाद से आज तक न यहाँ कोई सरकारी योजना का लाभ मिला और न ही कोई शौचालय का बनवाया गया.

 
सबसे बात करने के बाद हम इसी साल हारे एक और पूर्व प्रधान से मिले. उनसे भी हमने पुछा देश के प्रधान मंत्री का नाम क्या है तो उन्होंने काफी सोचने के बाद नरेन्द्र मोदी का नाम बताया. अब हमने उनसे पुछा की गाँव में शौचालय क्यों नहीं बने. तो उनका जवाब था की मेरे कार्यकाल में पैसा तो आया था लेकिन बाद में उस पैसे को दूसरी ग्राम सभा में ट्रान्सफर कर दिया गया. काफी प्रयास किया वापस लाने का लेकिन कामयाबी हाँथ नहीं लगी. पूर्व प्रधान ने ये भी बताया कि करीब 50 साल हो गये इस गाँव में शौचालय की शक्ल किसी ने नहीं देखी. न ही कभी कोई विकास हुआ. गाँव की सभी महिलाये गाँव के बहार शौंच के लिए जाने को मजबूर है.

 
 सीतापुर के मुख्य विकास अधिकारी का कहना है की सीतापुर के सभी गाँव शौचालय मुक्त किये जा रहे है. जल्दी लक्ष्य पूरा होगा. लेकिन जब उनको पलारिहा गाँव की तस्वीर का पता चला तो वो चौंक गए. और उन्होंने एक टीम भेज कर जांच के बाद विकास की बात कही.

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